एयफोर्स के एकलौते मार्शल अर्जन सिंह का निधन, 60 तरह के विमानों को उड़ाने में थे माहिर

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के एकलौते मार्शल अर्जन सिंह का रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया। 98 वर्षीय अर्जन सिंह को दिल का दौरान पड़ने के बाद शनिवार सुबह भर्ती कराया गया था। 1965 की जंग में पाकिस्तान के छक्के छुड़ानी वाली वायुसेना के साथ-साथ पूरा देश उनकी उपलब्धियों पर गर्व महसूस करता है। मार्शल अर्जन सिंह 15 अप्रैल 1919 को पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान का हिस्सा) में जन्म हुआ था। 1938 में तत्कालीन ब्रिटिश राज में रॉयल एयरफोर्स कॉर्नवेल के लिए अर्जन का चुनाव हुआ। इसके बाद दिसंबर 1939 में आरएएफ कॉलेज में स्नातक के बाद पायलट के रूप में कमीशन मिला। 1944 में द्वितीय विश्वयुद्ध में अराकान अभियान के स्क्वॉड्रन-1 का नेतृत्व किया। फिर 1945 में भारतीय वायुसेना के एक्जीविशन फ्लाइट के कमांडेड की भूमिका निभाई थी। 1971 में सेवानिवृत्ति के बाद स्विट्जरलैंड के राजूदत बनाए गए। 1974 में अफ्रीकी देश केन्या के उच्चायुक्त की भूमिका निभाई । अर्जन सिंह साल 1975 से 1985 तक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य और दिसंबर 1989 से दिसंबर 1990 तक दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे। इसके अलावा ये उपलब्धियां भी अर्जन को महान बनाती हैं।

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रक्षा मंत्री से मांगा था एक घंटे का समय
तत्कालीन रक्षामंत्री ने जब अर्जन सिंह से पूछा कि वायुसेना कितने समय में कार्रवाई कर सकती है। इसपर अर्जन सिंह ने तुरंत कहा कि जिस तरह के हालात हैं, उसमें वायुसेना महज कुछ घंटों में अपनी कार्रवाई शुरू कर देगी। अर्जन सिंह ने अपने शब्दों को यर्थाथ में बदला और महज घंटे भर में पाकिस्तानी सेना पर भारतीय वायुसेना ने बम बरसाने शुरू कर दिए।
1965 में मिला था पद्म विभूषण
अर्जन सिंह के इस अजेय पराक्रम को भारत सरकार ने सम्मानित किया और उन्हें 1965 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। साथ ही उन्हें पदोन्न्ति देकर एयर चीफ मार्शल बनाया। अर्जन सिंह ने 1969 में वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए।
60 तरह के विमान को उड़ाने का अनुभव
अर्जन सिंह पहले वायुसेना प्रमुख थे, जो इस पद पर काबिज होने तक विमानों को उड़ाते थे। उन्हें 60 तरह के विमानों का उड़ाने का अनुभव प्राप्त था। इनमें द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले के बाईप्लेंस से लेकर जटिल ग्नाट एंड वैम्पायर शामिल है। उन्होंने परिवहन सुपर कांस्टलेशन को उड़ाया था।
मार्शल बनने वाले पहले वायुसेना अधिकारी
भारत सरकार ने अर्जन सिंह के योगदान को सम्मानित करने के लिए जनवरी 2002 में वायुसेना के मर्शल नियुक्त किए गए। पांच सितारा पाने वाले वह एकमात्र अधिकारी है। यह पद थलसेना के फील्डमार्शल के समकक्ष है, जिससे केवल जनरल मानेक शॉ और जनरल करियाप्पा सम्मानित हुए थे। 27 जून 2008 में मानेक शॉ के निधन के बाद अर्जन एकमात्र जीवित पंच सितारा अधिकारी थे।

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