मोबाइल से पैसा ट्रांसफर करने वाले यूजर सावधान, एप्प के जरिए पैसा चुरा रहा ये वायरस

loading...

नई दिल्ली। अगर आप स्मार्टफोन से इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल रिचार्ज, या दूसरे कामों के लिए ईबैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो ज़रा अलर्ट हो जाइये। देश में एक नए मालवेयर कैफेकॉपी ट्रोजन का पता लगा है। यह आपके मोबाइल फोन से पैसा चुरा रहा है। साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्काई ने एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। दुनियाभर में 37.5 प्रतिशत साइबर हमलों का पता लगाने वाली कैस्परस्काई की रिपोर्ट की मानें तो सिर्फ भारत में मालवेयर ने करीब 40 प्रतिशत लोगों की जेब में डाका डाला है।
कैस्परस्काई लैब विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल मालवेयर वैप बिलिंग भुगतान प्रणाली को निशाना बना रहा है। यह मालवेयर लोगों की जानकारी के बिना उनके मोबाइल फोन के खाते से पैसा गायब कर रहा है। कैफेकॉपी ट्रोजन मालवेयर बैटरीमास्टर जैसे उपयोगी एप्स में छिपा होता है। कैस्परस्काई लैब के वरिष्ठ मालवेयर विश्लेषक रोमन उनचेक का कहना है कि कैफेकॉपी उन देशों को निशाना बना रहा है, जहां वैप बिलिंग प्रणाली ज्यादा इस्तेमाल में लाई जा रही है।
कैसे काम करता है कैफेकॉपी ट्रोजन
कैस्परस्काई की रिपोर्ट के मुताबिक इस एप्प के इंस्ट्रॉल हो जाने के बाद कैफेकॉपी मालवेयर वायरलेस एप्लीकेशन प्रोटोकॉल बिलिंग के साथ वेब पेज पर क्लिक करता है। वैप मोबाइल भुगतान का एक तरीका है जोकि उपभोक्ता के मोबाइल फोन बिल से सीधे चार्ज काट लेता है। इसके बाद मालवेयर चुपके से फोन पर कई सेवाओं को सब्सक्राइब कर लेता है। इस प्रोसेस में रजिस्ट्रेशन के लिए डेबिट या क्रेडिट या फिर यूजरनेम या पासवर्ड की जरूरत नहीं पड़ती है। मालवेयर कैप्चा सिस्टम से बचकर निकलने की तकनीक इस्तेमाल करता है, जिससे मोबाइल उपभोक्ता को किसी तरह से पता न चले। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक महीने के अंदर कैफेकॉपी ट्रोजन ने 47 देशों में 4800 से अधिक उपभोक्ताओं को निशाना बनाया। इन देशों में भारत, रूस, तुर्की और मैक्सिको भी शामिल हैं।
बचाव के तरीके
– एप्प डाउनलोड करते वक्त सावधानी बरतें।
– थर्ड पार्टी एप्प को डाउनलोड न करें।
– बिना वेरिफाइड पब्लिशर्स का एप्प डाउनलोड न करें।
– मोबाइल में प्रीमियम एंटी वायरस का इस्तेमाल करें।
– सिक्योरिटी सेटिंग्स में जाकर अननोन सोर्सेस ऑप्शन को ऑफ रखें।
– समय-समय पर मोबाइल फोन के सॉफ्टवेयर को अपडेट करते रहें।
अब तक के बड़े साइबर हमले
1- याहू (2013): ये अब तक का सबसे बड़ा डाटा चोरी का मामला था। इस साइबर हमले में करीब एक अरब अकाउंट से डाटा चोरी किया गया।
2- ईबे (2014): 14.50 करोड़ यूजर्स को पासवर्ड बदलने को कहा गया था। साइबर हमले में हैकर्स ने उपभोक्ताओं का पासवर्ड, नाम और जन्मतिथि जैसा डाटा चोरी कर लिया था।
3- सोनी (2014): सोनी पिक्चर एंटरटेनमेंट पर हुए साइबर हमले में 47 हजार कर्मचारियों और कलाकारों की निजी जानकारी लीक हो गई थी।
4- यूएस सेंट्रल कमांड (2015): हैकर्स ने दावा किया कि सेंट्रल कमांड के यूट्यूब और ट्विटर के लिंक उन्होंने हैक कर लिए हैं। दावे को सच साबित करने के लिए कमांड का लोगो चेंज कर उसकी जगह एक नकाबपोश का चेहरा लगा दिया गया था।
5- एश्ले मेडिसन (2015): एडल्ट डेटिंग वेबसाइट को हैक करने के बाद हैकर्स ने इसके 3.7 करोड़ उपभोक्ताओं के नाम जाहिर करने की धमकी दी थी।
6- टॉक-टॉक (2015): करीब 1.57 लाख उपभोक्ताओं की निजी जानकारी हैकर्स ने हासिल कर ली। 15,656 अकाउंट्स नंबर, सॉर्ट कोड और क्रेडिट कार्ड जानकारी चोरी कर ली।
7- माय स्पेस (2016): माना जाता है कि 36 करोड़ पासवर्ड और ई-मेल कुछ साल पहले चोरी कर लिए गए। इन्हें छिपे हुए इंटरनेट मार्केटप्लेस में प्लेस किया गया।
8- वानाक्राई रैनसमवेयर (मई 2017) : इस वायरस का 150 से अधिक देशों पर हमला, 2 लाख से अधिक कंप्यूटर चपेट में, बिटक्वाइन में फिरौती मांगी

loading...

Related Posts

About The Author

Add Comment