पर्यावरण मंत्री अनिल दवे का निधन, पढ़ें अाखिरी ख्वाहिश…

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नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और मोदी सरकार में पर्यावरण राज्‍यमंत्री अनिल माधव दवे का दिल का दौरा पड़ने से दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने दवे के निधन पर शोक व्यक्त किया।
मध्‍य प्रदेश के उज्‍जैन जिले के बरनागर गांव में 6 जुलाई 1956 को जन्‍मे दवे ने अपनी आरंभिक शिक्षा गुजरात में हासिल की। उन्‍होंने इंदौर से ग्रामीण विकास एवं प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ वाणिज्‍य में स्‍नातकोत्‍तर की डिग्री हासिल की। वह कॉलेज के दिनों में एक छात्र नेता थे।
पयार्वरण संरक्षण के लिए थे सक्रिय
दवे पयार्वरण मंत्री बनने से पहले ही पयार्वरण संरक्षण के अभियान में काफी सक्रिय रहे थे। नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए उन्होंने अपना एक संगठन बना रखा था। वह पयार्वरण के क्षेत्र में काफी अध्ययन करते थे और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का भारत की ओर से अनुमोदन किये जाने में दवे ने अहम भूमिका निभाई थी।
पढ़ें अनिल दवे की अंतिम इच्छा
अनिल दवे के निधन के बाद उनके भाई ने उनकी वसीयत को जारी किया। 23 जुलाई 2012 को लिखी गई वसीयत में दवे ने लिखा था कि उनकी स्मृति में कोई भी स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रतिमा को न बनाया जाए। दवे की इच्छा थी कि उन्हें याद करने के लिए वृक्षों को बोया जाए और उन्हें बड़ा किया जाए। साथ ही उनके चाहने वाले नदी और जलाशयों को बचाने का काम करें।

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