लोकसभा में GST के 4 बिल पास, जानें फायदे-नुकसान …

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नई दिल्ली (प्रमुख संवाददाता) लोकसभा ने केंद्र सरकार के ऐतिहासिक GST बिल के चार विधेयकों को मंजूरी दे दी है। मोदी सरकार ने लोकसभा को आश्वस्त किया कि नई टैक्स प्रणाली में उपभोक्ताओं और राज्यों के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखने के साथ ही कृषि पर टैक्स नहीं लगाया गया है। लोकसभा में केंद्रीय माल एवं सेवा कर, एकीकृत माल एवं सेवा कर, संयुक्त राज्य क्षेत्र माल एवं सेवा कर और माल एवं सेवा कर विधेयक 2017 ध्वनिमत से पारित किया गया। अब इन चारों विधेयकों पर राज्यसभा में चर्चा होगी।
अलग-अलग चीजों पर एक समान टैक्स नहीं
GST विधेयकों पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि जीएसटी परिषद पहली संघीय निर्णय करने वाली संस्था है। संविधान संशोधन के आधार पर जीएसटी परिषद को मॉडल कानून बनाने का अधिकार दिया गया। जहां तक कानून बनाने की बात है तो यह संघीय ढांचे के आधार पर होगा, वहीं संसद और राज्य विधानसभाओं की सर्वोच्चता बनी रहेगी। हालांकि इन सिफारिशों पर ध्यान रखना होगा क्योंकि अलग अलग राज्य अगर अलग दर तय करेंगे तो अराजक स्थिति पैदा हो जायेगी। एक समान कर बनाने की बजाए कई कर दर होने के बारे में आपत्तियों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कई खाद्य उत्पाद हैं जिनपर अभी शून्य कर लगता है और जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद भी कोई कर नहीं लगेगा। कई चीजें ऐसी होती हैं जिन पर एक समान दर से कर नहीं लगाया जा सकता।
क्या होता है GST
GST लागू होने से हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स की जगह ए

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क ही टैक्स लगेगा। आम लोगों को पूरे देश में सामान पर देश के लोगों को एक ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। वर्तमान में वस्तुओं पर भिन्न प्रकार के टैक्स लगते हैं।
सभी टैक्स हो जाएंगे खत्म
GST लागू होते ही केंद्र को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स सब खत्म हो जाएंगे। राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लक्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स, चुंगी आदि भी खत्म हो जाएगी।
आम आदमी का फायदा-नुकसान
आप किसी भी राज्य में रहते हो लेकिन आपको हर सामान एक ही कीमत पर मिलेगा। जैसे अगर दिल्ली में किसी गाड़ी को खरीदा जाता है तो दूसरे राज्यों की अपेक्षा उसकी कीमत अलग होती है। यानी जीएसटी के लागू होने से आम आदमी को सस्ता सामान मिलेगा। भारत में साल 2006-07 के आम बजट में पहली बार इसका जिक्र किया गया था। वस्तुओं और सेवाओं पर लगने वाले अधिकतर करों को जीएसटी के अंतर्गत लाने का प्रस्ताव है। जीएसटी लागू होने पर कंपनियों का परेशानियां और खर्च भी कम होगा। व्यापारियों को सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। एक टैक्स संरचना होने से उनके लिए टैक्स भरना भी आसान होगा। जब किसी कंपनी को अलग-अलग टैक्स नहीं चुकाना पड़ेगा तो सामान बनाने की लागत घटेगी, इससे सामान सस्ता होने की उम्मीद है।

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